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Wednesday, 19 July 2017

महिलाओं की गर्भनिरोधक दवाओं के कारण अंडे दे रही हैं न र मछलियां?

महिलाओं की गर्भनिरोधक दवाओं के कारण अंडे दे रही हैं नर मछलियां? 
दुनिया भर से आए दिन पर्यावरण और धरती के प्राकृतिक प्रक्रियाओं में अचानक और अजीब बदलाव की खबरें आने लगी हैं. कभी बाघिनों के गर्भवती न हो पाने की समस्या, कभी कछुओं के अंडों से बच्चों का निकलने के तुरंत बाद ही मर जाना, ये ऐसी घटनाएं हैं, जिनके पीछे इंसानों का दखल ही है. लेकिन अब एक और हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है.
एक नए अध्ययन के मुताबिक, समंदर में नर मछलियों का लिंग प्रभावित हो रहा है, ये मछलियां ट्रांसजेंडर हो रही हैं और इसके पीछे गर्भ-निरोधक दवाइयों का हाथ है. महिलाएं जो गर्भनिरोधक दवाइयां इस्तेमाल करती हैं, वो फ्लश होने के बाद नदियों और समंदर में पहुंचती हैं.
अंडे दे रही हैं नर मछलियां
रिसर्चर्स का कहना है कि इन दवाइयों का असर इस हद तक हो रहा है कि नदियों की नर मछलियों में मादा के लक्षण देखने को मिल रहे हैं. नर मछलियां अंडे दे रही हैं और इनका स्वभाव भी कम आक्रामक हो गया है. इनके स्पर्म की गुणवत्ता में भी कमी आई है, जो उनकी जनन क्षमता को प्रभावित कर रहा है.
अध्ययन में ये भी कहा गया है कि इसके पीछे गर्भनिरोधक दवाइयों के अलावा प्लास्टिक, साफ-सफाई के केमिकल और कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट भी शामिल हैं. इनके अलावा एंटी-डिप्रेशन के लिए ली जा रही दवाइयां भी इन मछलियों के व्यवहार पर बुरा प्रभाव डाल रही हैं.
इंग्लैंड की एक्स्टर यूनिवर्सिटी के चार्ल्स टाइलर ने 'द टेलीग्राफ' से कहा, 'हम दिखा रहे हैं कि इन केमिकलों का इन मछलियों पर इतना भयंकर असर हो रहा है, जिसका हमें डर है. हमने शोध में दिखाया है प्लास्टिक में पाया जाने वाला ऑस्ट्रोजन इन मछलियों के दिल के वॉल्व पर असर डालता है.'
इस अध्ययन में सीवेज प्लांटों में मिले 200 से अधिक रसायनों में ऑस्ट्रोजन के प्रभाव मिले हैं.
 

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