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उप राष्ट्रपति चुनाव: वेंकैया नायडू क्यों हैं भाजपा की पहली पसंद, पढ़िए 10 कारण


Venkaiah Naidu









भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपने राष्ट्रपति चुनाव के समापन के कुछ देर बाद ही उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वेंकैया नायडू के नाम की घोषणा की। उन्होंने कहा, 'भाजपा संसदीय दल की बैठक और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दलों से विचार-विमर्श के बाद हमने वेंकैया नायडू जी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है।' पढ़िए आखिर क्यों वेंकैया नायडू के नाम पर भाजपा और आरएसस दोनों ने अपनी सहमति दी...
1. वेंकैया नायडू आंध्रप्रदेश से आते हैं। एनडीए राष्ट्रपति पद के लिए पहले ही उत्तर भारत से रामनाथ कोविंद को खड़ा कर चुकी है और उनके राष्ट्रपति बनने की प्रबल संभावना है।भाजपा पूरे देश में अपने विस्तार की कोशिश में लगी है। वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद का दावेदार बनाए जाने से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पार्टी की पैठ बढ़ेगी। 
2. वेंकैया नायडू चार बार राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं। वह वर्तमान में राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके पास राज्यसभा का गहन अनुभव है। वह संसदीय कार्य मंत्री भी हैं और उनके पास संसद के कायदे-कानून की पूरी जानकारी है।
3. वेंकैया नायडू बचपन से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। संघ और बीजेपी दोनों किसी ऐसे नेता को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाना चाहते थे, जिसको संघ और बीजेपी की विचारधारा की समझ हो। ऐसे में वेंकैया नायडू से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था।
4. वेंकैया नायडू बचपन से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। संघ और बीजेपी दोनों किसी ऐसे नेता को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाना चाहते थे, जिसको संघ और बीजेपी की विचारधारा की समझ हो। ऐसे में वेंकैया नायडू से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था।
5. वेंकैया नायडू वर्तमान भाजपा सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक हैं। वह सरकार के लिए संकटमोचन की भूमिका निभाते हैं।
6. प्रतिबंधित मांस रखने के आरोप में जब अखलाख की हत्या कर दी गई थी तो केंद्र सरकार पर चारों ओर से हमले होने शुरू हो गए। इस दौरान वेंकैया नायडू ने ही आगे आकर पार्टी की विचारधारा को साफ किया। उन्होंने कहा कि "कुछ लोगों का कहना है कि बीजेपी सभी को शाकाहारी बनाना चाहती है। यह लोगों की पसंद है कि वह क्या खाना चाहते हैं और क्या नहीं।" इसी बीच अमित शाह द्वारा दी गई पार्टी में जाते हुए उन्होंने साफ किया कि संडे मतलब बिरयानी डे।
7. बता दें कि वेंकैया कॉलेज के दिनों से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वे 1975 की इमरजेंसी में जेल भी गए थे। इसके साथ ही वे 1977 से 1980 तक यूथ विंग के अध्यक्ष भी रहे। 
8. वेंकैया नायडू का पूंजीपतियों और अन्य पार्टियों के नेताओं के साथ बहुत अच्छे संबंध हैं। 
9. गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने पिछले सप्ताह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपनी ओर से प्रत्याशी घोषित किया था। भूतपूर्व आईएएस अधिकारी रहे गोपालकृष्ण गांधी कई देशों में राजदूत और उच्चायुक्कत रहने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं। ऐसे में एनडीए की तरफ से उन्हें चुनौती देने के लिए किसी कद्दावर चेहरे की जरूरत थी।
10. वेंकैया नायडू का उप राष्ट्रपति बनना भले ही राज्य सभा के लिए बेहद लाभदायक हो लेकिन यह प्रधानमंत्री मोदी के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। नायडू ने कई मौकों पर आकर प्रधानमंत्री मोदी का बचाव किया है, ऐसे में उनका उप राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ऐसा कर पाना मुश्किल होगा।


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