राष्ट्रपति चुनाव: सोनिया की मीटिंग से पहले ही JDU ने कोविंद को किया सपोर्ट - .

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Wednesday, 21 June 2017

राष्ट्रपति चुनाव: सोनिया की मीटिंग से पहले ही JDU ने कोविंद को किया सपोर्ट


राष्ट्रपति चुनाव: सोनिया की मीटिंग से पहले ही JDU ने कोविंद को किया सपोर्ट
पटना.एनडीए के राष्ट्रपति पद के कैंडिडेट रामनाथ कोविंद को टीआरएस, बीजेडी, AIADMK, YSR कांग्रेस, शिवसेना के बाद अब जेडीयू का भी सपोर्ट मिल गया है। पार्टी इसका एलान बुधवार शाम कर सकती है। ऐसा कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इसकी जानकारी सोनिया गांधी को दे दी है। बता दें कि विपक्ष की इस मुद्दे पर 22 जून को मीटिंग है। जानकारों की मानें तो एनडीए के पास राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लेने वाले इलेक्टोरल कॉलेज के 57.85% वोट हैं। लिहाजा कोविंद आसानी से अगले राष्ट्रपति बन जाएंगे। अगर अपोजिशन अपने कैंडिडेट को उतारने का फैसला करता है तो भी कोविंद के राष्ट्रपति बनने में दिक्कत पेश नहीं आएगी। एलान शाम को किया जाएगा...
- राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सीएम नीतीश कुमार ने बुधवार को जेडीयू विधायकों, मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। बाद में जेडीयू विधायक रत्नेश सदा ने सपोर्ट की बात कही। इसका ऑफिशियल रूप से घोषणा शाम को सीनियर लीडर्स से मुलाकात के बाद की जाएगी।
- उन्होंने कहा‌‌- " हम लोग रामनाथ कोविंद को सपोर्ट करेंगे। मुख्यमंत्री ने भी यही कहा है। रामनाथ अच्छे आदमी हैं। हम लोग उनके साथ हैं। वह बिहार के डेवलप के लिए सोचते रहते थे। यह पहली बार हो रहा है कि बिहार के राज्यपाल को सीधे राष्ट्रपति बनाया जा रहा है।"
- नीतीश ने विधायकोंं से वन टू वन बात की है। विधायकों ने नीतीश को फैसला लेने के लिए अधिकृत किया। सभी एमएलए को पटना में ही रहने को कहा गया है। इससे पहले नीतीश कुमार ने कहा था कि कोविंद का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाने से मैं पर्सनली खुश हूं।
- बता दें कि जेडीयू के वोटों की संख्या 1.91% है।
शिवसेना क्यों नरम पड़ी?
- मंगलवार शाम को शिवसेना ने भी कोविंद का समर्थन करने का एलान किया।
- बीजेपी को तेवर दिखाने वाली शिवसेना नरम पड़ी, क्योंकि महाराष्ट्र में दलित एक अहम राजनीतिक शब्द है। कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए खड़ा करके बीजेपी ने दलितों को अपनी तरफ आकर्षित करने का काम किया है।
- शिवसेना अगर इसका सपोर्ट नहीं करती तो महाराष्ट्र के दलित वोटरों के बीच गलत मैसेज जा सकता था। साथ ही शिवसेना के सपोर्ट नहीं करने से कोविंद की उम्मीदवारी पर खास फर्क नहीं पड़ता। एनडीए आसानी से कोविंद को राष्ट्रपति बनवा देती।
विपक्ष की मीटिंग़ कल, 26 मई को सोनिया के लंच में ये नेता हुए थे शामिल
- राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्ष की 22 जून को बैठक करेगा। इससे पहले, 26 मई को सोनिया गांधी ने विपक्षी नेताओं के लिए लंच होस्ट किया था। इसमें विपक्ष की 16 पार्टियां शामिल हुई थीं।
1. कांग्रेस: सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मनमोहन सिंह, 2. एनसीपी- शरद पवार, 3. सीपीआई(एम) - सीताराम येचुरी , 4. सीपीआई- डी राजा , 5 आरजेडी- लालू प्रसाद यादव, 6. टीएमसी- ममता बनर्जी , 7. बीएसपी- मायावती , 8. एसपी - अखिलेश यादव 9. डीएमके- कनिमोझी, 10. जेडीयू- शरद यादव। नीतीश कुमार नहीं पहुंचे, 11. एआईयूडीएफ- बदरुद्दीन अजमल, 12. जेडीएल- एचडी देवगौड़ा, 13. इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग, 14. झारखंड मुक्ति मोर्चा, 15. केरल कांग्रेस, 16. नेशनल कॉन्फ्रेंस।
(नोट- 17. बीजू जनता दल, 18. तेलंगाना राष्ट्रीय समिति, 19. एआईएएमडीके सोनिया के लंच में शामिल नहीं हुईं।)
TRS, AIADMK और वाईएसआर कांग्रेस ने भी दिया एनडीए को समर्थन
- एनडीए के पास मौजूदा इलेक्टोरल कॉलेज 5,37,683 है जो कुल वोट का 48.93% है। वहीं, टीआरएस, एआईएडीएमके और वाईएसआर कांग्रेस ने एनडीए को समर्थन देने का एलान कर दिया है।
- टीआरएस के 1.99%, एआईएडीएमके के 5.39% और वाईएसआर कांग्रेस के 1.53% वोटों की मदद से एनडीए के पास 57.85% वोट हो गए हैं।
- बीजेडी चीफ और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने एनडीए को सपोर्ट करने का फैसला किया है। बीजेडी के पास 2.99% वोट हैं।
इन दो दलों ने भी दिए UPA से अलग होने के संकेत
1) BSP: मायावती ने कहा है कि यूपीए अगर कोविंद से बेहतर दलित कैंडिडेट उतारे तो बीएसपी उस पर विचार करेगी। ऐसा नहीं होने पर वह कोविंद को सपोर्ट करेगी। बीएसपी के 0.86% वोट हैं।
2) SP:मुलायम सिंह भी एनडीए उम्मीदवार को सपोर्ट कर सकते हैं। ऐसा हुआ तो 2.37% के वोट भी एनडीए को मिलेंगे।
- जेडीयू के पास 1.91%. सपा का 2.37% और बसपा के पास 0.86% वोट हैं। अगर ये पार्टियां भी सपोर्ट करती हैं तो एनडीए के पास इलेक्टोरल कॉलेज के 65.98% वोट हो जाएंगे।
ऐसे होगा राष्ट्रपति चुनाव
# 4896 वोटर राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा ले सकेंगे। इनमें 4120 MLAs और 776 MPs शामिल हैं।
# 20 AAP के विधायकों के खिलाफ हाउस ऑफ प्रॉफिट के मामले में केस चल रहा है, लेकिन इलेक्शन कमीशन का कहना है कि आज की बात करें तो ये लोग वोट डाल सकेंगे।
# 12 नॉमिनेटेड राज्यसभा मेंबर्स भी वोट नहीं डाल सकेंगे। इसके अलावा, लोकसभा में दो एंग्लो-इंडियन कम्युनिटी के नॉमिनेटेड मेंबर्स भी वोट नहीं डाल सकेंगे।
# 10 खाली सीटें हैं राज्यसभा की, जिनके लिए चुनाव की घोषणा राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही की जाएगी।
कितने वोट जरूरी
- टोटल MLAs: 4114
- टोटल MPs: 776
- MLAs की वोट वैल्यू: 5,49,474
- MPs की वोट वैल्यू: 5,48,408
- टोटल वोट वैल्यू: 10,98,882
- किसी भी दल को अपनी पसंद का प्रेसिडेंट बनाने के लिए 50% यानी 5,49, 442 वोटों की जरूरत है।
NDA के पास पहले कितने वोट थे?
- लोकसभा, राज्यसभा, स्टेट असेंबली को मिलाकर टोटल 5,27,371 वोट होते हैं। कोविंद के एलान से पहले एनडीए का टोटल वोट पर्सेंटेज 48.10% है।
UPA के पास कितने वोट हैं?
- साझा कैंडिडेट उतारने की स्थिति में सभी अपोजिशन पार्टियां एक हो जाती हैं तो टोटल वोट 5,68,148 होंगे यानी करीब 51.90%।
लोकसभा में बहुमत, 17 राज्यों में भाजपा सरकार और अब राष्ट्रपति भी, तो ये बड़े फैसले संभव...
- भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक फिर लाए। तीन बार ऑर्डिनेंस लाने के बाद इसे ड्रॉप करना पड़ा था।
- लोकसभा-विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए जरूरी कदम अब तेजी से उठाए जा सकते हैं।
- चुनावों की स्टेट फंडिंग पर बहस लंबे समय से चल रही है। पार्टी और सरकार इसे अमल में लाने के लिए नया कानून ला सकती है।
 

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