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कश्मीर में पत्थर फेंकने वालों को काबू करने इस्तेमाल होंगी प्लास्टिक की गोलियां


नई दिल्ली: कश्मीर घाटी में बढ़ती हुई हिंसा के कारण हो रही मौतों को देखते हए केंद्र सरकार ने सुराख़ ना करने वाली गोलियों का इस्तेमाल घाटी में करने की हिदायत सुरक्षा बलों को दी है. ऐसा इसलिए क्योंकि हाल की हुई वारदातों में देखा गया है कि पथराव के दौरान अक्सर सुरक्षा बलों और पत्थर फेंकने वालों के बीच कई बेगुनाह पड़ जाते हैं और मारे जाते हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘काउंटर इनसरजेंसी ऑपरेशंस में कोलैटरल नुक़सान होता है उससे कई निर्दोष मारे जाते हैं, इस प्लास्टिक गोली से ऐसा नहीं होगा.’ हालांकि मंत्रालय ने साफ़ कर दिया कि पैलेट गन घाटी में इस्तेमाल होती रहेगी. कई हज़ार बुलेट घाटी भेज भी दी गई हैं.
प्लास्टिक बुलेट से नुक़सान कम होता है और उसे इंसास राइफ़ल से भी शूट किया जा सकता है. घाटी में हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें आतंकवादी भी भीड़ की आड़ लेकर सुरक्षा बलों को चकमा देने में कामयाब रहे हैं. पिछले साल पैलेट गन से 11 लोग मारे गए और 235 घायल हए थे, तब केंद्र ने घाटी में PAVA शेल भेजे थे. इसका इस्तेमाल सामने वाले व्यक्ति के शरीर में जलन पैदा कर देता है और वह कुछ न कर पाने की हालत में पहुंच जाता है. PAVA शेल्स से ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता. इसके अलावा बीएसएफ की टीयर स्मोक यूनिट (टीएसयू) द्वारा बनाया गया ‘स्टन ग्रेनेड’ भी एक विकल्प है जो घाटी में इस्तेमाल गो रहा है. यह टारगेट को बेहोश कर देता है और कुछ मिनट के लिए अंधा कर देता है. साभार NDTV

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