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आईसीसी नहीं माना तो चैंपियंस ट्रॉफी से हट जाएगा बीसीसीआई


मुंबई: कौन जीतेगा चैंपियंस का वर्ल्ड कप, भारतीय टीम इस चैंपियनशिप में इस बार दुनिया के बाकी देशों को टक्कर देगी या नहीं, यह इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के दफ्तर में, पैसों के बंटवारे को लेकर उसके रुख से तय होगा. आईसीसी के चैंपियंस ट्रॉफी से पहले पैसों के बंटवारे में अगर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की अनदेखी हुई तो वो चैंपियंस ट्रॉफी से हटने का फैसला भी ले सकता है. बोर्ड के सारे सदस्य इस बात पर लगभग एकमत हैं.
बोर्ड ने अपनी विशेष आमसभा में सबकी मंज़ूरी से कह दिया है कि आईसीसी को उनका पैगाम दे दिया जाए कि वह बिग थ्री मॉडल’ को बरकरार रखे. गौरतलब है कि बिग थ्री मॉडल में आईसीसी की कमाई से बीसीसीआई को 20.3, ईसीबी को 4.4% और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया को 2.7% मिलता था. यह फॉर्मूला उनके राजस्व से तय हुआ था. आईसीसी के नए राजस्व मॉडल के तहत बीसीसीआई की कमाई 900 करोड़ रुपये तक कम हो सकती है जिसके खिलाफ बोर्ड ने सख्त तेवर दिखाए हैं. सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद बोर्ड के संयुक्त सचिव 27,28 अप्रैल को आईसीसी की दुबई में होने वाली बैठक में बोर्ड का पक्ष रखेंगे. बैठक में यह भी तय हुआ कि राज्य संघ प्रशासकों से टकराव का रास्ता छोड़कर सहयोग की बात करेंगे. एन श्रीनिवासन की आईसीसी में नुमाइंदगी की तमाम कोशिशों पर भी विरोध के कई सुर छिड़े. यह तय हुआ कि सीओए के सुझाव के मुताबिक आईसीसी से बातचीत होगी जिसमें वे 11 पन्नों के खत से पहले जता चुके हैं.” आईसीसी का संविधान और प्रस्तावित वित्तीय मॉडल अगर स्वीकृत होते हैं तो हम एमपीए अनुबंधों के तहत अपने अधिकारों और कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल कर सकते हैं. हमें भरोसा है कि आईसीसी नए संविधान और वित्तीय मॉडल को एमपीए के तहत देखेगा ताकि हमें कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल ना करना पड़े. आप सूचना के साथ ज़रूरी कार्रवाई के लिये आईसीसी को हमारे नज़रिये के बारे में बता दें. शशांक मनोहर इस्तीफे के बाद आईसीसी में वापस आ चुके हैं, बोर्ड को लगता है कि आईसीसी यह मानकर बैठी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बीसीसीआई का ढांचा कमजोर हुआ है, ऐसे में सीओए और तमाम राज्य संघों के एकसाथ सहयोग से वह पूरी ताकत से ‘बिग थ्री मॉडल’ के लिये लड़ाई लड़ेगी.आखिरकार सवाल अगले दस सालों में 3400 करोड़ रुपये की ‘मोटी’ कमाई का है. साभार NDTV

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