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पत्रकारों को महाराष्ट्र में मिला कानून का संरक्षण


मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा ने पत्रकारों और मीडिया घरानों पर हमले रोकने से संबंधित विधेयक पारित कर दिया. इस कानून के बाद महाराष्ट्र में पत्रकारों और मीडिया हाउस पर हमला ग़ैरजमानती अपराध होगा. पत्रकार संरक्षण कानून को मंजूरी मिलने के बाद पत्रकारों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को सम्मानित भी किया.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में ‘महाराष्ट्र मीडियापर्सन्स एंड मीडिया इंस्टीट्यूशन्स (प्रीवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डेमेज ऑर लॉस ऑफ प्रॉपर्टी) अधिनियम, 2017’ निचले सदन में पेश किया. विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति में इसे बिना चर्चा के पारित कर दिया गया. विधेयक मीडिया कर्मी के तौर पर अपने कर्तव्य का निर्वहन करते पत्रकारों के खिलाफ हिंसा को निषेध करता है और राज्य में मीडिया कर्मियों या मीडिया संस्थानों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उन्हें बर्बाद करने से रोकता है. विधेयक में तीन साल तक की सजा और 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. सरकारी आंकड़े बता रहे हैं कि पत्रकारों के लिए महाराष्ट्र सबसे खतरनाक प्रदेश बना हुआ है. जेडे हत्याकांड के अलावा अनेकों मामलों में पत्रकार और मीडिया हाउस निशाने पर बने हुए थे. इसी वजह से पिछले 12 साल से राज्य के पत्रकार इस तरह के संरक्षण कानून के लिए संघर्ष कर रहे थे. वरिष्ठ पत्रकार एसएम देशमुख कहते हैं कि महाराष्ट्र में हर 4 दिन में 1 पत्रकार पर हमला हो रहा है. गत साल 84 पत्रकारों पर तो इस साल के शुरुआती 3 महीनों में 16 पत्रकारों पर हमले हुए हैं. नया कानून बनने के बाद पेशेवर पत्रकारों के साथ ही फ्रीलांसरों और ठेके पर काम कर रहे पत्रकारों को भी संरक्षण मिलेगा. प्रिंट और टीवी पत्रकारिता के साथ ऑनलाइन पत्रकारिता को भी संरक्षण मिलेगा. पत्रकारों पर हमला करने वालों को और पत्रकारिता की आड़ में अनुचित काम करने वालों को 3 साल तक की सज़ा मिलेगी या 50 हजार का जुर्माना होगा. हमलावर को पीड़ित के इलाज और मीडिया हाउस के नुकसान का मुआवजा देना होगा.

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