रेलों में यात्रियों को मिलेगा स्थानीय भोजन - .

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Friday, 10 March 2017

रेलों में यात्रियों को मिलेगा स्थानीय भोजन


नई दिल्ली: रेलों में मिलने वाले खाने की क्वालिटी सुधारने के लिए रेल मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं. ट्रेनों में निजी विक्रेताओं द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन के संतोषजनक नहीं होने की बात को स्वीकार करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए एक नई कैटरिंग नीति लाई गई है. प्रभु ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के उत्तर में कहा कि निजी ठेकेदारों द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा भोजन लोगों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं है. इसीलिए नीति में बदलाव की जरूरत थी.
उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत आरसीटीसी सर्वोत्तम मशीनीकृत रसोई का संचालन करेगा. इसके अलावा निविदा तैयार की जा रही है ताकि ट्रेनों में यात्रियों को प्रख्यात पेशेवर सेवा दे सकें. उन्होंने कहा कि लोगों को स्थानीय भोजन ‘एथनिक फूड’ मुहैया कराने के प्रयास चले रहे हैं ताकि उनमें देश की भोजन विविधता झलक सके. ट्रेनों में भोजन को शौचालयों के पास रखे जाने के सवाल पर रेल मंत्री ने कहा कि भोजन संबंधी शिकायतों को दर्ज कराने के लिए लिए एक हेल्पलाइन बनाई गई है. इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी शिकायत की जा सकती है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बताया कि देश के 115 रेलवे स्टेशनों पर 50 लाख यात्रियों को निशुल्क वाईफाई सेवा मुहैया कराई गई है तथा रेलवे की इस तरह की सुविधा को बाद में चलती ट्रेनों में भी मुहैया कराने की योजना है. उन्होंने बताया कि रेलवे की सहायक कंपनी रेलटेल को 400 रेलवे स्टेशनों पर वाईफाई सुविधा लागू कराने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके लिए सरकार ने कोई धन आवंटित नहीं किया है. उन्होंने कहा कि फरवरी माह में 115 स्टेशनों पर मुहैया कराई जा रही वाईफाई सेवा के तहत करीब 50 लाख लोग इस सेवा का उपयोग कर रहे थे. उन्होंने कहा कि पहले बैच में कुल 400 स्टेशनों को कवर किया जाएगा. सुरेश प्रभु ने कहा कि वाईफाई एक सार्वजनिक सेवा है और उसे केवल रेलवे यात्रियों को मुहैया नहीं कराया जाता बल्कि सटेशन पर आने वाले सभी लोग इसका लाभ लेते हैं जिसमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं. उन्होंने कहा कि चलती ट्रेनों में वाईफाई सेवा मुहैया कराने के मामले में कुछ ट्रेनों में पहले से ही यह सुविधा दी जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत रेलवे का प्रयास 10 साल की अवधि में कुशल ऊर्जा प्रबंधन के जरिए 41,000 करोड़ रूपए बचाने का है.

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