क्लार्क ने कोहली की आक्रमणता की तारीफ की - .

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Tuesday, 14 March 2017

क्लार्क ने कोहली की आक्रमणता की तारीफ की


मुंबई: पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क ने भारतीय कप्तान विराट कोहली की आक्रमणता की तारीफ की है. अपनी आत्मकथा ‘माई स्टोरी’ के विमोचन के अवसर पर क्लार्क ने कहा कि विराट कोहली जीतने के लिए हारने का भी जोखिम उठाते हैं. मेरा मानना है कि यह अद्भुत है. क्लार्क ने कोहली की कप्तानी की भी तारीफ की.
क्लार्क ने कहा कि कोहली की अपनी शैली है. उसके पास खेल के लिए प्रेम, जुनून और इच्छा है. वह हर कीमत पर जीतना चाहता है. क्लार्क ने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फिल ह्यूज की मौत के बाद एकजुटता दिखाने के लिए कोहली की प्रशंसा की, जो क्लार्क के अच्छे दोस्त थे. कोलकाता में पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने माइकल क्लार्क की आत्मकथा ‘माइ स्टोरी’ का विमोचन किया. इस मौके पर ‘मंकीगेट’ का भी जिक्र हुआ. सौरव गांगुली ने कहा कि मैं आपको गारंटी देता हूं कि किताब में ‘मंकीगेट’ अध्याय की सही तस्वीर नहीं होगी. सिर्फ ‘सरदारजी’ को पता होगा कि हरभजन सिंह क्या कहने की कोशिश कर रहे थे. आप इसे ‘मंगीगेट’, ‘हनुमानगेट’ या कोई भी गेट कह सकते हैं. वहीं क्लार्क ने कहा कि उनका मानना है कि 2007-08 का मंकीगेट प्रकरण काफी लंबा खींच लिया गया था. क्लार्क ने एंड्रयू साइमंड्स और हरभजन सिंह से जुड़े मंकीगेट प्रकरण और वर्तमान विवाद को लेकर बात करते हुए कहा, मैंने उस समय एससीजी की स्थिति को देखा था. मैं एंड्रयू साइमंड्स का काफी करीबी था. मैंने उससे कहा कि क्या उसके खिलाफ नस्ली टिप्पणी की गई. यह केवल एंड्रयू के खिलाफ नस्ली टिप्पणी से जुड़ा मसला नहीं था. उसे उसी समय समाप्त किया जाना चाहिए था और खेल भावना से खेल आगे जारी रखना चाहिए था. सिडनी टेस्ट में भारत की 122 रन की हार के बाद हरभजन पर नस्ली टिप्पणी का आरोप लगाया गया. पहले उन पर तीन मैच का प्रतिबंध लगाया गया जिसे बाद में कम किया गया. क्लॉर्क ने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और क्रिकेट आस्ट्रेलिया (सीए) के बीच निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) को लेकर उठे विवाद को सुलझा लिए जाने से खुश हैं. क्लॉर्क ने कहा कि यह फैसला खेल के लिए अच्छा है. उल्लेखनीय है कि बंगलुरु में समाप्त दूसरे टेस्ट मैच के दौरान डीआरएस को लेकर मैदान के अंदर और बाहर खिलाड़ियों के व्यवहार के लिए कई घटनाएं हुई थीं. मैदान के अंदर जहां छींटाकशी का दौर जारी था, वहीं मैदान के बाहर आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे. बीसीसीआई ने इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) में एक आधिकारिक शिकायत दर्ज की. हालांकि, दोनों बोर्डो के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की बैठक के बाद बीसीसीआई ने इस शिकायत को वापस ले लिया और इस विवाद को समाप्त करने का फैसला भी किया.

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