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Thursday, 16 March 2017

शनिवार को तय होगा यूपी के सीएम का नाम


नई दिल्ली: उप्र का नया मुख्यमंत्री कौन होगा यह शनिवार को तय हो जाएगा. लखनऊ में शनिवार शाम को बीजेपी के नवनिर्वाचित 312 विधायकों की बैठक होगी, जिसमें राज्य के नए मुख्यमंत्री का नाम तय किया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को यूपी की जिम्मेदारी सौंपे जाने की अटकलों के बीच सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस मामले पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पद की रेस में मोदी सरकार में मंत्री मनोज सिन्हा और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ही आगे चल रहे हैं.
गोवा और मणिपुर में जहां बीजेपी को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ था, वहां उन्होंने बहुत जल्दी सरकार गठन कर लिया, लेकिन यूपी में ऐतिहासिक जीत के बावजूद मुख्यमंत्री का नाम अभी तक तय नहीं हो सका है. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की कोशिश है कि यूपी के सीएम के रूप में किसी ऐसे व्यक्ति को चुना जाए, जो बीजेपी के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के साथ-साथ राज्य में जातीय समीकरण के लिहाज से भी ज्यादा सटीक बैठ सके. बीजेपी अब 2019 के आम चुनावों को लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाह रही है और उसकी कोशिश है कि यूपी में वह अपने जनाधार को और व्यापक बनाए. उत्तर प्रदेश से लोकसभा के लिए 80 सदस्य चुने जाते हैं. मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल लोगों के हर पहलुओं की बेहद बारीकी से आकलन के बाद अब रेस में सिर्फ दो नाम शामिल बताए जा रहे हैं. ये हैं – केंद्रीय दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य. सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके मनोज सिन्हा को बेहतर प्रशासक माना जाता है. उन्होंने प्रतिष्ठित बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी यानी बीएचयू से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी. लेकिन मनोज सिन्हा का एक कमजोर पहलू यह है कि वह सवर्ण जाति से आते हैं. यूपी चुनावों में बीजेपी को दलितों और पिछड़ी जातियों का काफी समर्थन मिला, ऐसे में पार्टी उन्हें नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहेगी. इस लिहाज से अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले केशव प्रसाद मौर्य का चयन बीजेपी की समस्या का समाधान कर सकता है. मौर्य को पिछले साल इसी आधार पर बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, जिसके बाद पार्टी ने दलितों और पिछड़ों के बीच पैठ बनाना शुरू किया. मौर्य के पक्ष में एक और बात जाती है और वह है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका पुराना नाता. हालांकि बीजेपी के लिए यह बात परेशानी की हो सकती है कि मौर्य के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं और अगर उन्हें सीएम बनाया गया तो विपक्षी दल बीजेपी को निशाने पर लेगी. बीजेपी यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश यादव और उनकी समाजवादी पार्टी के खिलाफ बार-बार कानून-व्यवस्था का मुद्दा और कथित ‘गुंडाराज’ को ही उछालती रही थी. विधानसभा चुनावों की जबर्दस्त जीत से आम जनता की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं, जिन्हें पूरा करना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती होगी. 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश के मामले में पार्टी कोई भी ऐसा फैसला नहीं लेना चाहती, जिससे आगे चलकर नुकसान हो.

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