कानपुर ट्रेन हादसे के पीछे ISI का हाथ - .

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Wednesday, 18 January 2017

कानपुर ट्रेन हादसे के पीछे ISI का हाथ


नई दिल्ली: कानपुर में हुई रेल दुर्घटना महज एक हादसा थी या किसी की सुनियोजित साजिश? रेलवे की जांच रिपोर्ट कुछ भी कहे लेकिन बिहार में पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है जिनके तार कानपुर जैसी ही घटना रक्सौल-दरभंगा रेल लाइन पर अंजाम देने की कोशिश से जुड़े हैं। इसके पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ माना जा रहा है। इस मामले की जांच के लिए यूपी एटीएस की टीम बिहार पहुंच गई है। एटीएस की टीम बिहार के मोतिहारी जिले का दौरा करेगी। तीनों संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और कानपुर हादसे के पीछे इनकी संलिप्तता की जांच की जाएगी।
गौरतलब है कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस का 20 नवंबर को कानपुर के पुखरायां रेलवे स्टेशन के पास एक्सीडेंट हो गया था। उस हादसे में करीब 150 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। बताया जाता है कि इस पूरे रैकेट के पीछे दुबई में बैठा एक शख्स है जो भारत में तबाही के लिए नेपाल के भाड़े के टट्टुओं का इस्तेमाल कर रहा है। उसका नाम शमसुल होदा बताया जाता है जो पाक की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ा हुआ है।वहीं संदिग्धों की गिरफ्तार से मिल रहे इनपुट के बाद यूपी एटीएस ने अपनी टीम बिहार भेजी है। कई और बड़े खुलासे की संभावना है. दरअसल एक अक्टूबर को रक्सौल दरभंगा रेल लाइन पर एक बम बरामद ।
पुलिस ने बम डिफ्यूज कर दिया।उसके बाद कानपुर में 20 नवंबर को रेल हादसा हुआ। लेकिन असली कहानी 25 दिसंबर से शुरू होती है जब पूर्वी चंपारण के आदापुर इलाके से चाचा और भतीजा के गायब होने की सूचना पुलिस को मिलती है। पुलिस अभी उनकी खोजबीन कर ही रही थी कि उनका शव 28 दिसंबर को उसी इलाके में बरामद हो जाता है। पुलिस ने हत्या के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जिनके नाम हैं मोती पासवान, उमाशंकर पटेल और मुकेश यादव। इन तीनों से पुलिस जब कड़ाई से पूछताछ करती है तब इस कहानी में नया मोड़ आता है। दरअसल इन चाचा-भतीजा ने ही घोडासहन में ट्रेन उड़ाने की सुपारी ली थी। सुपारी देने वाले का नाम है ब्रज किशोर गिरी जो नेपाल का निवासी है। नेपाल में भी ब्रजकिशोर के साथ दो अन्य आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं जिनके नाम हैं मुजाहिर अंसारी और शंभूगिरी।पूर्वी चंपारण के एसपी जितेंद्र राणा ने बताया कि चाचा-भतीजा की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वो अपने मिशन में फेल हो गए थे। ट्रेन के गुजरने के दौरान वो पटरी पर बलास्ट नहीं कर पाए। इस साजिश में कुल 10 आरोपी हैं जिनमें दो की हत्या हो चुकी है और 6 को गिरफ्तार कर लिया गया है तीन को बिहार में और तीन को नेपाल में. दो आरोपी अभी भी फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक मोती पासवान ने ही कबूला है कि कानपुर रेल दुर्घटना कराने की साजिश भी रची गई थी। इससे जुड़े कुछ अपराधियों को सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ा भी है जिनका जल्द खुलासा भी हो सकता है।रेलवे राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि मोतीहारी से हमने कमलेश पासवान को गिरफ्तार किया है। उसने स्वीकार किया है कि उसके गिरोह ने मोतिहारी के पास रेलवे ट्रैक पर तोड़फोड़ की थी। उसने ये भी माना है कि उसकी गैंग का पुखरायां ट्रेन हादसे में हाथ था।आईबी, खुफिया एजेंसी, पुलिस और आरपीएफ पूछताछ कर रहे हैं।

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