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धोनी के बोझ को कम करने के लिए वनडे में युवराज को चुना गया

धोनी के बोझ को कम करने के लिए वनडे में युवराज को चुना गया

पुणे: जब से महेंद्र सिंह धोनी ने कप्तानी से इस्तीफा दिया तब से क्रिकेट प्रेमियों के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है कि आखिर महेंद्र सिंह धोनी एक बल्लेबाज और विकेटकीपर के तौर पर टीम इंडिया में किस पोजिशन पर खेलेंगे। हालांकि कोहली ने इंग्लैंड के खिलाफ तीन एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों के पहले मैच की पूर्व संध्या पर कहा इस संदर्भ में कुछ संकेत दिए हैं।
कप्तान विराट कोहली ने शनिवार को टीम में युवराज सिंह के चयन की वजह भी बताई। कप्तान विराट का कहना है कि अनुभवहीन मध्यक्रम को मजबूती देने और महेंद्र सिंह धोनी के बोझ को कम करने के लिए वनडे में युवराज को चुना गया है। गौरतलब है कि युवराज ने अंतिम वनडे सेंचुरियन में दिसंबर 2013 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। हालांकि उन्होंने पिछले साल मार्च में मोहाली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना अंतिम टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। कोहली ने कहा, हां, युवी को चुनने से पहले हमने अनुभव के बारे में चर्चा की थी क्योंकि हम मध्यक्रम में महेंद्र सिंह धोनी पर इतना बोझ नहीं डाल सकते। मैं उपरी क्रम की जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं लेकिन अगर शीर्ष क्रम नहीं चलता तो इससे निचले क्रम में धोनी के साथ एक और खिलाड़ी को होना चाहिए। कोहली के बयान से साफ है कि धोनी पहले की तरह पांचवें या छठवें क्रम में बल्लेबाजी करते नजर आएंगे। इतना ही नहीं विराट पहले की भांति तीन नंबर पर खेलेंगे। महेंद्र सिंह धोनी का साथ युवराज सिंह देंगे। उन्होंने अपनी रणनीति के बारे में खुलासा करते हुए कहा अगर शीर्ष क्रम नहीं चलता तो आपके पास सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी ही बचते हैं और वह युवाओं का इतने समय से नेतृत्व कर रहे हैं। अगर आपके पास बड़े टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले 15-20 मैच हैं तो यह सही है लेकिन जब आपके पास बड़े टूर्नामेंट की तैयारी के लिए केवल तीन ही मैच हो तो मुझे लगता है कि आपको सारे संयोजन सही रखने की जरूरत है। विराट कोहली के बयान से साफ है कि धोनी निचले क्रम में बल्लेबाजी को प्रदान करेंगे। पूरी उम्मीद है कि मैच फिनिशर के रूप में वही धोनी खेलते हुए मैदान में क्रिकेट प्रेमियों को नजर आए।

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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