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बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में तय होगा चुनावी एजेंडा


नई दिल्ली: चुनाव के ऐन मौके पर शुक्रवार से बीजेपी की 2 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में शुरू हो रही है। 2 दिन की बैठक में चुनाव में पार्टी का मुद्दा एजेंडे पर पार्टी का पूरा फोकस रहने वाला है, बीजेपी के लिए वैसे तो पांचों राज्यों के चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है लेकिन उत्तर प्रदेश का चुनाव 2019 के लोकसभा चुनावों की दृष्टि से खासा महत्व रखता है इसलिए पार्टी उप्र चुनाव को देखते हुए अपनी रणनीति तय करेगी।
राष्ट्रीयकरण की बैठक शुरू होने से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में पदाधिकारियों और स्टेट प्रेसिडेंट्स की मीटिंग होगी। जिसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी के एजेंडा को अंतिम रुप दिया जाएगा। इस बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संबोधित करेंगे जिसके बाद शाम को राष्ट्रीय कार्य करने की बैठक शुरु होगी जहां अमित शाह बैठक को संबोधित करेंगे। अमित शाह अपने भाषण में काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए मोदी सरकार के नोट बंदी के कदम की सराहना करते हुए विपक्षी पार्टियों के इस मामले में रवैये की आलोचना कर सकते हैं, साथ ही वह अपने भाषण में सर्जिकल स्ट्राइक का भी जिक्र कर सकते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आखिरी दिन यानी 7 जनवरी को अपने भाषण में काले धन और भ्रष्टाचार को लेकर उठाए गए नोटबंदी के फैसले पर अपनी बात रख सकते हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा की गई जनहित के कार्यो की घोषणाओं की चर्चा भी कर सकते हैं, मोदी इस बात पर बल दे सकते हैं कि सभी को अपने अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों के बीच इन जनहित कार्यों के बारे में लोगों को बताना चाहिए। कार्यकारिणी में दो प्रस्ताव पारित किए जाएंगे एक राजनीतिक प्रस्ताव और दूसरा आर्थिक प्रस्ताव। आर्थिक प्रस्ताव में काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार के फैसलों को लेकर प्रस्ताव पारित होगा जिसमें नोटबंदी का जिक्र होगा। प्रस्ताव में सरकार के निर्णयों का समर्थन किया जाएगा और इसकी आलोचना करने के लिए विपक्षी दलों पर हमला किया जाएगा। आर्थिक प्रस्ताव में मोदी सरकार द्वारा उठाए गए जनहित के कार्यों का भी जिक्र होगा जबकि राजनीतिक प्रस्ताव में सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र होगा। इसके अलावा पांच राज्यों में होने वाले चुनाव खासतौर से उत्तर प्रदेश को लेकर रणनीति तय की जाएगी।

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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