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सुप्रीम कोर्ट ने कहा सरकार को पहले बजट पेश करने से कोई कानून नहीं रोकता


नई दिल्ली: एक फरवरी को बजट पेश करने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट 20 जनवरी को सुनवाई करेगा। सुनवाई में अदालत ने पूछा ऐसा कौन सा प्रावधान है जो सरकार को बजट की तारीख बदलने से रोकता हो। इस मामले में वकील एम एल शर्मा ने याचिका दाखिल की है।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि ढूंढ़े पर भी ऐसा कोई कानून नहीं मिलता जो सरकार को ये फैसला लेने से रोकता हो। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि बजट को फरवरी में पेश करने से संविधान और कानून के कौन से प्रावधान का उल्लंघन होगा। एम एल शर्मा को अगली सुनवाई में जवाब दाखिल करना होगा। याचिका में शर्मा ने 2017-18 के बजट को 1 फरवरी को पेश करने के फैसले को गलत बताया है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की वोटिंग पूरी होने तक सरकार को बजट पेश करने से रोका जाए। आमतौर पर बजट फरवरी महीने के आखिर में पेश होता आया है। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि बजट में पारित किए गए नए नियमों, नीतियों और स्कीमों को नोटिफाई करने में काफी वक्त लगता है। बजट फरवरी के अंत में पेश होने की वजह से नोटिफिकेशन 1 अप्रैल तक अक्सर नहीं हो पाता इसलिए बजट को 1 फरवरी को पेश करने का फैसला लिया गया है।

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