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गावस्कर के बाद धोनी ने शिष्टता और दूरदर्शिता का परिचय दिया


मुंबई: करिश्माई कप्तान रहे महेंद्र सिंह धोनी ने कप्तानी के अपने कार्यकाल के दौरान अपनी आत्मा की आवाज पर सही समय पर सही निर्णय करने की क्षमता का अद्भुत उदाहरण पेश किया और एक बार फिर से उन्होंने अपने भारत के सीमित ओवरों के कप्तान पद से हटने का फैसला करके अपने इस कौशल को दिखाकर हर किसी को ‘स्टंप’ आउट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
किसी को पता नहीं कि धोनी ने अंग्रेजी की कविता इनविक्टस पढ़ी थी या नहीं या उन्होंने हॉलीवुड अभिनेता मोर्गन फ्रीमैन की आवाज में यह सुना कि नहीं कि मैं अपने भाग्य का मालिक हूं, मैं अपनी आत्मा का कप्तान हूं। कविता का भाव भिन्न हो सकता है लेकिन उसकी भावना कहीं न कहीं जुड़ी हुई है, धोनी ने बुधवार रात जब अपना फैसला सार्वजनिक किया तो उनके मन में कहीं न कहीं ऐसे भाव बने होंगे। सुनील गावस्कर के बाद किसी भी भारतीय क्रिकेटर ने इस तरह की शिष्टता और दूरदर्शिता का परिचय नहीं दिया जैसा कि झारखंड के इस क्रिकेटर ने बुधवार को बीसीसीआई के जरिये सीमित ओवरों की कप्तानी छोड़ने की घोषणा करके दिया। जब गावस्कर ने कप्तानी से हटने का फैसला किया तो उन्होंने 1985 में बेंसन एंड हेजेस विश्व चैंपियनशिप जीती थी, इसके बाद जब उन्होंने संन्यास लिया तो चिन्नास्वामी स्टेडियम में 1987 में 96 रन की जानदार पारी खेली थी। ये ऐसे दौर थे जबकि लोग उनसे और खेलने की उम्मीद कर रहे थे। खिलाड़ियों को हम अमूमन यह कहते हुए सुनते हैं कि हम रिकॉर्ड के लिये नहीं खेलते लेकिन कितने इस पर अमल करते हैं। धोनी के मामले में हालांकि यह साबित होता है कि वह रिकॉर्ड के लिये नहीं खेलते, धोनी ने जब टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया तो वह देश की तरफ से 100 टेस्ट मैच खेलने से केवल दस टेस्ट दूर थे लेकिन उन्होंने अपनी दिल की आवाज सुनी और उस पर विश्वास किया। वहीं वनडे में भी वह 199 मैचों की कप्तानी कर चुके थे चाहते तो 200 का आंकड़ा छू सकते थे लेकिन ऐसा नहीं किया क्योंकि वह जानते थे कि विराट कोहली पद संभालने के लिये तैयार हैं और फैसला लेना का यही सही समय है। गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे कामयाब कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने वनडे और टी-20 की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। हालांकि धोनी वनडे और टी-20 मैच खेलते रहेंगे। धोनी इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली वनडे और टी-20 मैचों में चयन के लिए भी उपलब्ध रहेंगे। आपको बता दें कि धोनी टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले चुके हैं।

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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