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पूर्ण शक्ति केंद्र के पॉयलट प्रोजेक्ट को मंत्रि-परिषद की मंजूरी


भोपाल: मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अध्यक्षता में संपन्न मंत्रि परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य में पूर्ण शक्ति केन्द्र योजना के क्रियान्वयन के लिए महिला-बाल विकास के अंतर्गत भोपाल जिले में ग्राम कन्वर्जेन्स फेसिलिटेशन सेन्टर का संचालन किया जायेगा। इस केंद्र के लिए 26 पद के सृजन की मंजूरी दी गई। भारत सरकार की सहायता से पूर्ण शक्ति केन्द्र योजना में 60 प्रतिशत केंद्रांश और 40 प्रतिशत राज्यांश के मान से वित्तीय प्रावधान रहेगा। पायलट प्रोजेक्ट को संचालित करने के लिए एक जिला समन्वयक और 20 ग्राम समन्वयक कार्य करेंगे। दस ग्राम का चयन पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित ग्रामों के क्लस्टर के अनुसार किया जाएगा। पूर्ण शक्ति केंद्र योजना में ग्राम कन्वर्जेन्स फेसिलिटेशन सेन्टर के लिए स्वीकृत बजट के अंतर्गत प्रति ग्राम समन्वयक को एक हजार रुपए मासिक की दर से यात्रा व्यय मिलेगा।
मंत्रि-परिषद द्वारा मप्र में प्लास्टिक उद्योगों की संभावनाओं के परिप्रेक्ष्य में क्लस्टर डेव्हलपमेंट एप्रोच के अंतर्गत ग्राम बिलौआ जिला-ग्वालियर में प्लास्टिक पार्क की स्थापना और ग्वालियर के डबरा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे प्लास्टिक पार्क प्रोजेक्ट का नाम मप्र प्लास्टिक सिटी डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन ग्वालियर लिमिटेड रखे जाने का अनुमोदन किया गया। अब इस परियोजना के क्रियान्वयन की गति बढ़ेगी। परियोजना की कुल लागत 83.43 करोड़ है। इस एस पी व्ही में क्रियान्वयन एजेंसी आईआईडीसी ग्वालियर के न्यूनतम 51 प्रतिशत अंश के लिए अनुमोदन किया गया। परियोजना की प्रस्तावित लागत राशि में एस पी व्ही और आई आई डी सी ग्वालियर का अंशदान 24.49 करोड़ तथा वित्तीय संस्थाओं से ऋण राशि 20 करोड़ रुपए लेने के संबंध में निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने विशेष प्रकरण में कु सोनिया यादव को सामान्य प्रशासन विभाग में सहायक ग्रेड तीन के पद पर अनुकंपा नियुक्ति का निर्णय लिया। कु सोनिया के पिता स्व. रामशंकर यादव मुख्य प्रहरी जेल मुख्यालय के पद पर कार्यरत थे। मंत्रि-परिषद ने की बैठक में मप्र के विश्व प्रसिद्ध मैहर बैण्ड के संरक्षण के लिए 16 नये पदों की स्वीकृति दी। वर्तमान में इस बैण्ड के लिए 18 पद स्वीकृत है, जिसमें संगीतकार के 17 पद और सहायक बैण्ड मास्टर का 1 पद शामिल है। वर्ष 1918 से मैहर बैण्ड के नाम से शास्त्रीय संगीत की यह अनूठी और गौरवमयी परम्परा जीवंत है। पद्य विभूषण स्व. उस्ताद अलाउद्दीन खाँ की सांगीतिक तपस्या, उनके जीवन-दर्शन की धरोहर और भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में मैहर वाद्य-वृन्द (मैहर बैण्ड) को जाना जाता है। नये पदों के सृजन से लगभग 40 लाख रुपये का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा। सतना जिले के मैहर में स्थित शासकीय संगीत महाविद्यालय के अनुषंग के रूप में संस्कृति विभाग के प्रशासकीय नियंत्रण में मैहर वाद्य-वृन्द मध्यप्रदेश की एक अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। मैहर वाद्य-वृन्द को राष्ट्र का गौरव भी माना जाता है। अनेक महत्वपूर्ण अवसरों पर मैहर वाद्यवृन्द के संगीतकारों ने प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दी हैं।

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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