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सपा का अंदरूनी दंगल चुनाव आयोग की दहलीज पर पहुंचा


लखनऊ: समाजवादी पार्टी का अंदरूनी दंगल अब चुनाव आयोग की दहलीज पर पहुंच चुका है। जहां दांव पर है समाजवादी पार्टी की साइकिल यानी पार्टी का चुनाव चिह्न। एक तरफ मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और अमर सिंह आज दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलकर पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन को अवैध घोषित करने की मांग करेंगे और साथ ही अधिवेशन में लिए गए फैसले के खिलाफ शिकायत करेंगे।अखिलेश भी आज चुनाव आयोग से मिलकर पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा ठोक सकते हैं।
इससे पहले दोनों खेमे एक-दूसरे को चित करने के दावपेंच आज़माते नज़र आए। अखिलेश के गुट ने उन्हें पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया तो जवाबी वार करते हुए मुलायम सिहं यादव ने अधिवेशन बुलाने वाले पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव, पार्टी उपाध्यक्ष किरणमय नंदा और सांसद नरेश अग्रवाल को भी पार्टी से निकाल दिया। रामगोपाल को शनिवार को ही पार्टी में दोबारा वापस लिया गया था। अग्रवाल ने कहा कि अब अखिलेश उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लिहाजा मुलायम को उन्हें दल से निकालने का कोई हक नहीं है। मुलायम ने 5 जनवरी को राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया है। इधर, पार्टी मुख्यालय पर अखिलेश समर्थकों ने कब्जा कर लिया और शिवपाल यादव की नेम प्लेट तोड़ दी है। रविवार के अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर मुलायम की जगह अखिलेश को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष के पद से बर्खास्त कर दिया गया और अमर सिंह को सपा से निकाल दिया गया। बाद में अखिलेश ने अपने करीबी एमएलसी नरेश उत्तम को सपा का प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया। हालांकि अधिवेशन शुरू होने से कुछ ही देर पहले मुलायम ने एक चिट्ठी जारी कर इसे ‘असंवैधानिक’ बताते हुए इसमें शामिल होने वाले नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि वह हमेशा मुलायम सिंह का सम्मान करते थे और अब पहले से ज्यादा सम्मान करते हैं। जब समाज का हर वर्ग सपा की दोबारा सरकार बनाने का मन बना चुका था, तभी कुछ ताकतें साजिशों में जुट गईं। अब प्रदेश में जब दोबारा सपा की सरकार बनेगी तो सबसे ज्यादा खुशी नेताजी को होगी। भावुक हुए अखिलेश ने कहा कि नेताजी का स्थान सबसे ऊपर है। उन्हें डर था कि चुनाव से ऐन पहले ‘ना जाने कौन मिलकर उनसे (मुलायम) क्या करा देता। मुझे पार्टी के लिए कोई भी त्याग करना होगा, तो मैं करूंगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देते हुए आहवान किया कि आने वाले दो-ढाई महीने बहुत महत्वपूर्ण हैं। प्रदेश में एक ऐसी धर्मनिरपेक्ष सरकार बनानी है, जो उसे खुशहाली की राह पर ले जा सके। इसके पूर्व, रामगोपाल यादव ने अपने संबोधन में कहा कि पार्टी और सरकार का काम बहुत ठीक तरीके से चल रहा था और उसी दौरान पार्टी के दो व्यक्तियों ने साजिश करके अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटवा दिया। पार्टी में फिर एक संकट पैदा हो गया. उन्होंने कहा कि पार्टी में टिकटों का बंटवारा मनमाने ढंग से होने लगा था। प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय अध्यक्ष की तरफ से मनमाने असंवैधानिक फैसले लेते रहे। जो लोग पार्टी के सदस्य भी नहीं है, उन्हें टिकट दिए गए। स्पष्ट था यह लोग किसी भी कीमत पर नहीं चाहते थे, सपा चुनाव जीते और अखिलेश फिर मुख्यमंत्री बनें। रामगोपाल यादव ने कहा कि पानी जब सिर से ऊपर निकल गया तब पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने विशेष अधिवेशन बुलाने की लिखित मांग की थी। हमने दो महीने तक सुधार का इंतजार किया। तब यह निर्णय लिया गया कि पार्टी का विशेष आपातकालीन अधिवेशन बुलाया जाए।

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