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क्या लड़कियों को छेड़ना भारतीय संस्कृति है: मलाइका


मुंबई: नए साल को बेंगलुरू में हुई घटना पर देश भर में गुस्सा फूटता दिख रहा है। नए साल पर यूं तो ज्यादातर फिल्मी सितारे विदेशों में या देश में ही मस्तीभरी छुट्टियां बिताते दिखे, लेकिन इस घटना के बारे में सामने आते ही सितारों ने भी इस पर चुप्पी नहीं रखी और खुलकर अपनी बात सामने रखी है। इस कड़ी में आमिर खान, अक्षय कुमार और अनुष्का शर्मा के बाद मलाइका अरोड़ा ने भी अपना विरोध दर्ज कराया है। मलायका ने देश की हर लड़की की तरफ से जो लिखा है उसे पढ़ कर आपकी भी आंखे नम हो जाएंगी।
अक्सर ऐसी घटनाओं के बाद हमेशा लड़की के कपड़े, उसके अकेले होने या फिर उसके गलत समय पर बाहर रहने जैसे विषय उठाए जाते हैं। ऐसी हर घटना के बाद कहीं न कहीं लड़की को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। ऐसी की भावना के साथ मलाइका ने देश में महिलाओं की सुरक्षा और पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा किया है। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के कपड़ों पर टिप्पणी करने वाले लोगों की सोच पर एक करारा थप्पड़ मारा है। मलाइका ने अपने इस संदेश के आखिर में लिखा है कि अगर लड़कियां छोटे कपड़े पहन कर पाश्चात्य सभ्यता को फोलो कर रही हैं, तो जो लड़के उन्हें छेड़ते हैं क्या वह भारतीय सभ्यता की नकल कर रहे हैं। मलाइका ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक काला फोटो डाला और उसके साथ अपना संदेश लिखा है। मलायका ने लिखा, ‘सो, मैं अपनी सहेलियों के साथ एक बड़े मैट्रोपोलिटन शहर की भीड़भरी सड़कों पर पार्टी करने के लिए गई थी, वे बड़ी तादाद में वहां आए, और हमारे साथ छेड़खानी और बदतमीज़ी की… लेकिन मेरी सुरक्षा मेरी ज़िम्मेदारी है, सो…अगली बार मैं एक डिस्कोथेक में गई, वह चारों तरफ से बंद था, और वहां बाउंसर भी थे, वे उस जगह के भीतर आए, और हमें पीटा, और हमारे कपड़े फाड़ डाले… लेकिन मेरी सुरक्षा मेरी ज़िम्मेदारी है, सो… मैं अपने पुरुष मित्र के साथ फिल्म देखने गई, उन्होंने मुझे एक बस में धकेला और मेरे गुप्तांग में लोहे की छड़ डाल दी… लेकिन मेरी सुरक्षा मेरी ज़िम्मेदारी है, सो…उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं अपने कॉलेज गई थी, ‘शिष्ट’ सलवार-कमीज़ में पूरी तरह ढकी हुई, उन्होंने एक कोने में मुझे पकड़ लिया, और मुझे दबोचा… लेकिन मेरी सुरक्षा मेरी ज़िम्मेदारी है, सो… मैंने घर में ही रहने का फैसला किया, उन्होंने दरवाज़ा तोड़ डाला, मुझे बांध दिया, और फिर जो-जो मुझसे करवाया, उसका वीडियोटेप भी बनाया… लेकिन मेरी सुरक्षा मेरी ज़िम्मेदारी है, सो…’।

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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