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सितंबर में ही जीएसटी लागू होने की संभावना


नई दिल्ली: अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में आजादी के बाद से सबसे बड़े सुधार, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को लागू करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भले ही एक जुलाई 2017 की डेडलाइन तय की हो, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसे लागू करते-करते सितंबर 2017 का महीना आ सकता है।
जीएसटी की तैयारी में शुरू से ही जुड़े एक पेशेवर चार्टर्ड अकाउंटेंट ने नाम जाहिर नहीं करते की शर्त पर बताया कि जीएसटी लागू करने के लिए सबसे पहले इससे जुड़े कानूनों को संसद से पारित कराना होगा। उसके बाद इसके सॉफ्टवेयर को अंतिम रूप दिया जाएगा। तब उस सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग होगी, जिसमें कम से कम तीन महीने तो लगेंगे ही। टेस्टिंग में इतना लंबा वक्त क्यों, यह पूछने पर उन्होंने कहा कि पूरे देश के लिए यह सिस्टम बन रहा है जिसमें सभी राज्यों के वैट असेसी के साथ केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर के भी असेसी शामिल होंगे। यदि कहीं थोड़ी सी भी चूक हुई तो फिर बड़ी दुरूह स्थिति पैदा हो जाएगी। इसलिए सरकार इस मामले में कोई खतरा नहीं उठाना चाहेगी। पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान जीएसटी के लिए काम करने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि केंद्र सरकार की तैयारी तो सितंबर 2017 से ही इसे लागू करने की है। जुलाई का डेडलाइन इसलिए दिया गया है ताकि राज्य सरकारें इस दिशा में ढुलमुल रवैया नहीं अपनाएं और तेजी से अपने-अपने यहां विधानसभा से एसजीएसटी कानून को पारित करा लें। बाद में जो एक-दो राज्य इसमें देरी करेंगे, उनसे केंद्र सरकार वन टू वन बातचीत कर मसला सुलझा लेगी। गौरतलब है कि एसजीएसटी कानून को हर राज्य की विधानसभा से पारित कराना जरूरी है। एक अन्य विशेषज्ञ ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि यदि इसे एक जुलाई से देश भर में लागू कर दिया और पश्चिम बंगाल या किसी अन्य राज्य ने इसे लागू नहीं किया तो कारोबारियों को भारी परेशानी होगी। एक उदाहरण के जरिए उन्होंने बताया कि यदि केंद्र ने इसे एक जुलाई से लागू कर दिया और पश्चिम बंगाल ने इसे लागू नहीं किया। ऐसी स्थिति में यदि पंजाब में बना कोई माल वहां गया तो राज्य के अधिकारी उससे वैट मांगेंगे। जबकि कारोबारी कहेगा कि उन्होंने तो जीएसटी चुका दिया है। ऐसे में कारोबारी की ही स्थिति खराब होगी। लेकिन यह स्थिति सितंबर में पैदा नहीं होगी क्योंकि 16 सितंबर 2017 के बाद कोई राज्य वैट लगा ही नहीं पाएंगे।

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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