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संत और समाज की उपस्थिति में नर्मदा सेवा यात्रा अमरकंटक से प्रारंभ

yatra
भोपाल: पर्यावरण और नदी संरक्षण के लिये दुनिया का सबसे बड़ा जनअभियान मप्र की धार्मिक और पौराणिक नगरी अमरकंटक से शुरू हुआ। नमामि देवी नर्मदे-नर्मदा सेवा यात्रा के रूप में इस महत्वाकांक्षी अभियान का माँ नर्मदा नदी के उद्गम स्थल से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आचार्यों, महामण्डलेश्वरों, संत-महात्माओं, मंत्रीमण्डल के सदस्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूजा-अर्चना कर माँ नर्मदा के जयघोष के साथ शुभारंभ किया गया। सभी संतों ने अभियान की सराहना करते हुए इसकी सफलता की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ नर्मदा आज संकट में है। जंगल कम होने से नदी की धार कम हो गई है। माँ नर्मदा ने हमें पानी, बिजली, फसलें, फल,फूल सब्जी आदि सबकुछ दिया है, लेकिन हमने उसे प्रदूषित कर विभिन्न बीमारियों का न्यौता दिया है जिससे जीवन का अस्तित्व खतरे में है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है सम्हलने की और इस अपराध का प्रायश्चित करने को। यह प्रायश्चित वृक्षारोपण करने, जैविक खेती करने, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से पूरा होगा। यात्रा के शुभारंभ समारोह में स्वामी अखिलेश्वरानन्द महाराज, परमपूज्य संत हरिहरानन्द, परमपूज्य संत प्रज्ञा भारती, परमपूज्य संत नर्मदानंद आदि संत-महात्मा, गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा, सांसद एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, वन मंत्री एवं नर्मदा सेवा यात्रा के प्रभारी गौरीशंकर शेजवार, उद्योग एवं खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ला, लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा श्रम मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे, नर्मदा घाटी और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री लालसिंह आर्य, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय और राघवेन्द्र गौतम, आदिवासी वित्त एवं विकास निगम अध्यक्ष शिवराज शाह, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष शिव चौबे, राष्ट्रीय नेहरू युवा केन्द्र के उपाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, नर्मदा यात्रा संयोजक डॉ जितेन्द्र जामदार, सांसद ज्ञान सिंह, अजय प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में आयोगों के अध्यक्ष, विधायक एवं जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक नगरी अमरकंटक को सबसे सुंदर तीर्थ-स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। नर्मदा नदी में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के लिये साढ़े पंद्रह करोड़ रूपये से सीवेज ट्रीटमेंट प्लान स्थापित किया जायेगा। नर्मदा नदी के तटों पर बसे गरीबों को पक्के मकान बनाकर दिये जायेंगे। साथ ही व्यवस्थित दुकानें बनाई जायेंगी और शहर को नये ढंग से व्यवस्थित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न उद्देश्य को लेकर शुरू की गई 3334 किमी की यह यात्रा नर्मदा के दोनों तट से गुजरेगी जो 144 दिन में सम्पन्न होगी। यात्रा के दौरान दोनों तट पर एक-एक किलोमीटर तक फलदार, छायाछार पौधों का रोपण, स्वच्छता, जैविक खेती, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, के प्रति लोगों को जागरूक किया जायेगा। यह समाज और सरकार के सामूहिक संकल्प का प्रयास होगा। चौहान ने इस संबंध में उपस्थितजन को संकल्प भी दिलाया। उन्होंने कहा कि माँ नर्मदा के तट पर स्थित गाँवों में स्वच्छ शौचालय निर्माण और नगरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था, घाटों पर पूजन कुण्ड, मुक्ति धाम और महिलाओं के लिये चेंजिंग रूम बनाने का कार्य करवाया जायेगा। यात्रा का समापन 11 मई 2017 को अमरकंटक में होगा। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कहा कि माँ नर्मदा गुजरात की जीवनदायिनी है। उन्होंने गुजरात की जनता की ओर से यात्रा की सफलता की शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा कि माँ नर्मदा की पवित्रता के संरक्षण का यह अभियान कामयाब होगा। इस कार्यक्रम से ऐसा ही प्रयास गुजरात में करने की प्रेरणा हमें मिली है। उन्होंने कहा कि मप्र माँ नर्मदा का एक छोर और गुजरात दूसरा छोर है। माँ नर्मदा के जल का उपयोग मानव विकास में हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अथक प्रयास कर माँ नर्मदा का जल गुजरात में देश की सीमा तक पहुँचा दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर सहकार्यवाह भैय्याजी जोशी जी ने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति नदियों के तट पर विकसित हुई है। ऐसी पवित्र भूमि में हम सबको जन्म लेने का अवसर प्राप्त हुआ है जहाँ नदियों को माँ माना गया है। हमारी संस्कृति कहती है पंचभूतों को देवता मानकर उनकी पूजा करें क्योंकि पंचभूतों से ही शरीर का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा नदियाँ, वृक्ष, प्राकृतिक संसाधन हमारे लिये हैं इसलिये उनका संरक्षण करना हमारा परम कर्त्तव्य है। किसी भी कारखाने में वृक्ष और जल का निर्माण नहीं होता है। उन्होंने सबसे वृक्ष लगाने का आव्हान किया।

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