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सरकार से नाराज़ हैं भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी


नई दिल्ली: खेल पर आधारित फिल्मों में बेटियों को दांव लगाते और गोल करते देख हमारा सीना गर्व से फूल जाता हैं और तालियां सीटियां भी बजने लगती हैं। लेकिन असल ज़िन्दगी में जब देश की बेटी मेडल लेकर आती हैं तो अपने साथ कुछ सपने भी लाती हैं, सोचती हैं कि इस मेडल के साथ उसके और उसके परिवार का भी जीवन कुछ बदलेगा लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं हैं। इंडियन वीमेन हॉकी टीम की नेशनल प्लेयर पूनम रानी के भी कुछ ऐसे ही सपने थे, 10 साल से कभी देश को कभी राज्य को गौरवान्वित करने वाली पूनम को अभी तक अपना और अपने परिवार का गुज़ारा करने लायक तनख्वाह वाली एक नौकरी तक नहीं मिली।
पूनम हरियाणा के छोटे से गांव उमरा से हैं और 2007 से हॉकी खेल रही हैं, देश के लिए इतना खेलने के बाद भी आज पूनम सरकार से नाराज़ हैं क्योंकि उसके मुताबिक़ सरकार ने उससे कम मेडल वाले खिलाड़ियों को DSP की पोस्ट दी हैं लेकिन पूनम को अभी क्लर्क लेवल पर ही रखा गया हैं जिसकी तनख्वाह से एक खिलाड़ी की प्रॉपर डाइट और जूते तक नहीं आते हैं क्योंकि खेलने वाले जूते 10 से 13 हज़ार के आते है और सिर्फ 3 महीने चलते हैं। पूनम के पिता एक किसान हैं और इसीलिए परिवार पूनम पर ही आश्रित हैं। एशिया कप जीतने के बाद पूरे 36 साल बाद रियो ओलंपिक में गई भारतीय महिला हॉकी टीम का पूनम रानी एक अहम हिस्सा रहीं लेकिन उसके बाद भी आज अपनी नौकरी के लिए सरकार और फेडरेशन के चक्कर काट रही हैं। इतनी कोशिशों के बाद भी हर जगह से उसे सिर्फ आश्वासन ही मिलता हैं, हमने इस सिलसिले में खेल मंत्री विजय गोयल से भी बातचीत की और उन्होंने पूनम से मिलने की इच्छा भी जताई। खिलाड़ी अपना जीवन देश पर खेल के मैदान को समर्पित कर देता हैं, लेकिन अगर उसके बाद भी सरकार उसके अच्छे और फिट जीवन की जिम्मेदारी तक नहीं ले सकती तो वाकई ये एक चिंता का विषय हैं, फिलहाल पूनम अपने खेल के बदले हरियाणा सरकार से DSP का रैंक चाहती हैं ताकि वो अपने परिवार के लिए कुछ कर सके।

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