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ट्विंकल ने अपने पिता का अनोखे अंदाज में मनाया जन्मदिन


नई दिल्ली: सिनेमा इंडस्ट्री के पहले ‘सुपरस्टार’ राजेश खन्ना और ‘फनीबोन्स’ के नाम से प्रसिद्ध उनकी बेटी ट्विंकल खन्ना का जन्मदिन एक ही दिन यानी 29 दिसंबर को होता है। ट्विंकल खन्ना ने अपने पिता के जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुए उनके साथ का एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। अपने अनोखे अंदाज, अदाओं और शानदार अभिनय के लिए जाने जाने वाले राजेश खन्ना का निधन कैंसर की वजह से जुलाई 2012 में हो गया था।
सुपरस्टार राजेश खन्ना ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत 1966 में फिल्म ‘आखिरी खत’ से की थी. उनके इस फिल्मी सफर में ‘अराधना’, ‘आनंद’, ‘कटी पतंग’, ‘बावर्ची’, ‘चुपके-चुपके’, ‘महबूब की महंदी’, आन मिलो सजना’ और ‘सफर’ जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। राजेश खन्ना की फिल्म अराधना का गाना ‘ मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू…’ उन नगमों में से है जिसे आज भी राजेश खन्ना की अलग स्टाइल के चलते जाना जाता है. ‘जय जय शिव शंकर’, ‘जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर’, ‘रूप तेरा मस्ताना’, ‘बागों में बहार है’, ‘बिंदिया चमकेगी’, ‘चिंगारी कोई भड़के’ जैसे कई सुपरहिट रोमांटिक गानों में राजेश खन्ना का जादू साफ देखा जा सकता है। राजेश खन्न एक टेलेंट हंट प्रतियोगिता के विजेता बन कर फिल्मों में आए थे और उन्होंने उस जमाने में हिंदी सिनेमा में अपनी अलग जगह बनाई थी जब देवानंद, राजकपूर और दिलीप कुमार का स्टारडम अपने चरम पर था। यह टेलेंट हंट आयोजित कराया था यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर ने जिसमें लगभग 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। राजेश खन्ना ने 1973 में एक्ट्रेस डिंपल कपाड़िया से शादी की। हालांकि बाद में यह जोड़ी अलग हो गई लेकिन इनके बीच कभी तलाक नहीं हुआ। अपने पिता के साथ ही अपना जन्मदिन मनाने वाली ट्विंकल खन्ना, राजेश खन्ना और डिंपल की सबसे बड़ी बेटी हैं और उन्होंने अक्षय कुमार से शादी की. ट्विकंल ने शादी के बाद इंटीरियर डिजाइनर बनने के लिए अपना फिल्मी करियर छोड़ दिया। ट्विंकल, ‘फनी बोन्स’ और ‘द लिजेंड ऑफ लक्ष्मी प्रसाद’ नामक किताबें लिख चुकी हैं जहां ट्विंकल ने पिता के साथ फोटो शेयर कर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है, वहीं वह खुद पति अक्षय कुमार के साथ केपटाउन में अपनी छुट्टियां बिता रही हैं।

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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