अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने मारी बाजी - .

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Wednesday, 9 November 2016

अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप ने मारी बाजी

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नई दिल्ली: अमेरिका में 45वें राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप ने बाजी मार ली है। पूर्व विदेश मंत्री और डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन से ट्रंप का मुकाबला कांटे का रहा। चुनाव पूर्व हुए सर्वे में कभी डोनाल्ड तो कभी हिलेरी बाजी मारती दिखीं। लेकिन चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले रहे. 69 साल की हिलेरी का सियासी करियर इसी हार के साथ खत्म माना जा रहा है।
इस बार का अमेरिकी चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। प्रचार अभियान के दौरान तमाम विवाद भी सामने आए। इस चुनाव के नतीजों को राजनीतिक सत्ता के खिलाफ बगावत के तौर पर भी देखा जा रहा है। कुछ इसके लिए राजनीतिक सत्ता से ज्यादा हिलेरी क्लिंटन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। प्रचार अभियान के दौरान हिलेरी उन लाखों गुस्साए वोटरों के लिए अमेरिका की टूटी हुई सियासत का चेहरा बन गईं। ट्रंप ज्यादा से ज्यादा वोटरों को यह भरोसा दिलाने में कामयाब रहे कि वो सबकुछ ठीक कर देंगे। अरबपति बिजनेसमैन ट्रंप को वैसे तो ‘आउटसाइडर’ कहा गया था लेकिन वो उन्होंने साबित कर दिया कि वो ‘इनसाइडर’ से बेहतर हैं. ट्रंप ऐसे उम्मीदवार थे जिन्होंने खूब विरोध झेला जबकि हिलेरी सत्ता में यथास्थिति बनाए रखने की प्रतीक बनीं। हिलेरी क्लिंटन ने प्रचार अभियान के दौरान दावा किया कि वो राष्ट्रपति पद के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार हैं। उन्होंने अपनी सीवी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वो अमेरिका की विदेश मंत्री रह चुकी हैं। राष्ट्रपति की पत्नी रह चुकी हैं. न्यूयॉर्क से सीनेटर हैं। लेकिन उनका यह अनुभव काम नहीं आया और वोटरों पर असर डालने में नाकाम रहा। लोगों ने इसे निगेटिव तौर पर लिया. उन्होंने एक राजनेता पर एक बिजनेसमैन को प्राथमिकता दी। हिलेरी क्लिंटन के साथ भरोसे की बड़ी दिक्कत है। उनपर लोग भरोसा नहीं करते हैं। शायद यही वजह है कि हिलेरी के ईमेल स्कैंडल ने इतना तूल पकड़ा। हिलेरी की उम्र और उनकी गिरती सेहत भी वोटरों का उनपर भरोसा तोड़ने की वजह रही। ह्वाइट हाउस छोड़ने के बाद से क्लिंटन दंपति ने जो संपत्ति बटोरी थी वो भी काम नहीं आई। क्लिंटन दंपति को न सिर्फ ऐसे लिबरल की तौर देखा गया जो लिमोजीन में घूमते हैं बल्कि इनकी इमेज लियर जेट विमानों में घूमने वाले दंपति के तौर पर बनी। उनकी यह रईसी वर्किंग क्लास वोटरों को रास नहीं आई। हालांकि उन्होंने रियल स्टेट टायकून को अपना नेता चुना।

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