संविधान दिवस के मौके पर न्यायपालिका और केंद्र में टकराव - .

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Saturday, 26 November 2016

संविधान दिवस के मौके पर न्यायपालिका और केंद्र में टकराव

thakur
नई दिल्ली: न्यायपालिका और मोदी सरकार के बीच टकराव बढता जा रहा है। संविधान दिवस के मौके पर एक बार फिर दोनों आमने सामने आ गए. यहां ये भी साफ हो गया कि ये टकराव आगे भी चलेगा, क्योंकि देश के अगले चीफ जस्टिस जगजीत सिंह खेहर ने साफ कर दिया कि न्यायपालिका ही लोगों को राज्य की शक्तियों से बचाने का एकमात्र कवच है। ये कवच हटा तो अधिकार अमान्य होंगे और अराजकता हो जाएगी। ये ही लक्ष्मण रेखा है।
वहीं, भारत के मौजूदा प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने एक बार फिर न्यायपालिका में जजों की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि विभिन्न हाईकोर्ट में जजों के 500 पद खाली पड़े हैं। हालांकि कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जोरदार तरीके से इससे असहमति व्यक्त की। कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने जवाब देते हुए कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट इमरजेंसी वाले हालात को दोबारा न दोहराए। वहां कोर्ट फेल हुआ था। कोर्ट भले ही आदेश दे, नीतियों को ख़त्म करे ,लेकिन कार्यपालिका को वही चलाए, जिसे लोगों ने चुना है। संविधान ने लोगों को बताया कि वो कौन हैं। संविधान ने लोगों को बताया कि कैसे किसी भी शक्तिशाली नेता को कैसे हटाया जा सकता है। कोई भी लोकसभा का सदस्य बनाता है तो संविधान के तहत ही शपथ लेता है। ये लोगों को बराबरी का अधिकार देता है। उधर, देश के अगले चीफ जस्टिस जगजीत सिंह खेहर ने AG की बात का जवाब दिया कि न्यायपालिका ही नागरिकों को राज्य की शक्तियों से बचाने का एकमात्र कवच है। अगर इस कवच को हटा दिया जाए तो लोगों की गरिमा को बचाना मुश्किल होगा। संविधान ने न्यायपालिका को अलग अधिकार दिए हैं तो सरकार को अलग. प्रोगेसिव सिविल सोसाइटी और मीडिया संवैधानिक मूल्यों के लिए काम कर रहे है। सम्मान से जीना, खाना और रहना। इसे लेकर न्यापालिका ने हमेशा काम किए हैं। देश में रूल ऑफ लॉ ही रहेगा। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि संविधान ने सभी के लिए लक्ष्मण रेखा तय की है। किसी भी संस्थान को एक-दूसरे के संस्थानों के अधिकारों में दखल नहीं देना चाहिए।न्यायपालिका की भी अपनी लक्ष्मण रेखा है। हर किसी को लक्ष्मण रेखा के दायरे में रहना चाहिए। कोई किसी से बड़ा नहीं है, सब बराबर हैं। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा हाईकोर्ट में जजों के 500 पद खाली हैं। ये पद आज कार्यशील होने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं है। इस समय भारत में अदालत के अनेक कक्ष खाली हैं और इनके लिए जज उपलब्ध नहीं हैं।बड़ी संख्या में प्रस्ताव लंबित है और उम्मीद है सरकार इस संकट को खत्म करने के लिए इसमें हस्तक्षेप करेगी। न्यायमूर्ति ठाकुर केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अखिल भारतीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।चीफ जस्टिस के इस कथन से असहमति व्यक्त करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने इस साल 120 नियुक्तियां की हैं, जो 1990 के बाद से दूसरी बार सबसे अधिक हैं। इससे पहले 2013 में सबसे अधिक 121 नियुक्तियां की गई थीं।

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