नोटबंदी के मुद्दे पर सड़क से संसद तक संग्राम - .

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Wednesday, 16 November 2016

नोटबंदी के मुद्दे पर सड़क से संसद तक संग्राम

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नई दिल्ली: नोटबंदी के मुद्दे को लेकर समूचा विपक्ष सरकार के खिलाफ लामबंद दिख रहा है। संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष का तेवर आक्रामक दिख रहा है। बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस, सीपीएम, सपा, बसपा समेत तमाम दलों ने नोटबंदी के बाद आम लोगों को रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया। कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी ने तो नोटबंदी के फैसले के लिए पीएम मोदी की तुलना तानाशाहों से कर दी। हालांकि, सरकार ने साफ किया कि देश में काला धन खत्म करने के लिए ये कदम उठाया गया है और कई और कदम उठाए जा रहे हैं।
कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी ने मंगलवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नोटबंदी को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का कारनामा पीएम मोदी से पहले हिटलर, मुसोलिनी और गद्दाफ़ी कर चुके हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि पीएम मोदी, मुसोलिनी और गद्दाफी की तरह काम कर रहे हैं। नोटबंदी के मुद्दे पर कांग्रेस फैसले का विरोध करने से तो बच रही है, लेकिन संसद में आम जनता को हो रही परेशानी को मुद्दा बनाकर वो सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। कांग्रेस अपने नेतृत्व में संसद से राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालना चाहती थी, लेकिन अपने नेतृत्व में। भला राष्ट्रीय पार्टी एक क्षेत्रीय पार्टी के पीछे कैसे खड़ी होती, इसलिए ममता के मार्च से कांग्रेस दूर रही।बसपा प्रमुख मायावती ने नोटबंदी के फैसले की जेपीसी से जांच कराने की मांग की है वहीं कांग्रेस ने नोटबंदी के फैसले के पीछे सरकार पर घोटाले का आरोप लगा दिया। 500 और 1000 के नोट बंद करने के विरोध में विपक्षी दलों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकाला। इससे पहले कांग्रेस के आनंद शर्मा ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी के इस फैसले से देश में कैश का संकट खड़ा हो गया है. खासकर छोटे दुकानदार, किसान और मजदूरों के लिए संकट बहुत बड़ा है। आनंद शर्मा ने कहा कि किसान धोती में क्रेडिट कार्ड नहीं रखता है। सरकार ने सभी को अपराधी बना दिया. भारत को कालाबाजारियों का देश बना दिया गया है। नोटबंदी के फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए जेडीयू के नेता शरद यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि 50 दिन में हालत सुधर जाएंगे। लेकिन गरीब के पास खाने को पैसे नहीं है गरीब का पेट 50 दिन तक इंतजार नहीं करेगा। शरद यादव ने कहा कि गांवों की एक बड़ी आबादी बैंकों से आज भी दूर है और उसके पास एटीएम नहीं है। उसका सारा कामकाज कैश पर चलता था लेकिन सरकार के इस फैसले ने सबको मुश्किल में ला दिया है। शरद यादव ने कहा कि कैश की ब्लैकमार्केंटिंग हो रही है। 1000 के नोट 700 में बिक रहे हैं।

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