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नोटबंदी की मार झेल रही भारतीय मुद्रा को लगा धक्का

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नई दिल्ली: नोटबंदी की मार झेल रही भारतीय मुद्रा को बड़ा धक्का लगा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अबतक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। दिन का कारोबार शुरु होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होने लगा और रुपया उसके मुकाबले 30 पैसे लुढककर 68.86 के स्तर पर पहुंच गया।
मुद्रा बाजार के जानकार मान रहे हैं कि अब रुपये को 70 का स्तर पार करने से बचाना मुश्किल हो गया है। आम आदमी को डॉलर और रुपये का ये उतार-चढ़ाव पेंचीदा लग रहा होगा लेकिन वह एक बात साफ-साफ समझ सकते हैं कि रुपये में जारी ये गिरावट उनकी जेब पर बहुत भारी पड़ने जा रही है और नोटबंदी के साथ-साथ मजबूत डॉलर का दोहरा प्रहार उनके लिए सिर्फ महंगाई डायन को न्यौता दे रही है। मुद्रा बाजार में अब 1 डॉलर के मुकाबले रुपया 68 से 70 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है। अब मनी एक्सचेंजर से आम आदमी को एक डॉलर खरीदने के लिए 72 से 74 रुपये अदा करने होंगे। सोने के साथ-साथ कच्चे तेल के लिए हम पूरी तरह से आयात पर निर्भर हैं। सरकार के वार्षिक बजट का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चा तेल खरीदने में जाता है। अब महंगा होता डॉलर और सस्ता होता रुपया इस खरीद को महंगा कर देगा और सरकार को अपने खजाने से ज्यादा रुपये खर्च करना पड़ेगा। इसका सीधा असर देश में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर पड़ेगा और इनकी कीमत में इजाफा होना तय है। देश में ट्रांस्पोर्टेशन का प्रमुख जरिए हाईवे है। देश के एक कोने से दूसरे कोने तक रोजमर्रा की जरूरत की चीजें ट्रकों पर लदकर पहुंचती है। इनमें सब्जी, फल, दूध, जैसे जरूरी उत्पाद भी शामिल हैं। अब पेट्रोल और डीजल की कीमत में इजाफा इन सभी चीजों की कीमतों में इजाफा कर देगा। देश की अर्थव्यवस्था आयात पर निर्भर है. हम ज्यादा चीजों का आयात करते हैं और कम चीजों की निर्यात करते हैं। इससे हमारा (व्यापार नुकसान) ट्रेड डेफिसिट हमेशा निगेटिव रहता है। अब मजबूत डॉलर और कमजोर रुपया हमारे व्यापार नुकसान को बढ़ा देगा। इसकी भरपाई करने के लिए सरकार के पास कर में इजाफा करने का एक मात्र विकल्प रहता है।

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